Add To collaction

लेखनी कहानी -28-Dec-2022

🌷गीत🌷
मुकुलित मंजरिका, उपवन है.
शिशुता न्यून,अधिक यौवन है!

अंग अंग नव  यौवन  बिंबित,
नयन कर्ण तक दीर्घ  हो चले,
पूर्ण हुआ शिक्षण कटाक्ष का,
कुंतल  मध्य  मिलिंद मनचले.

नव निकुंज है  सघन  कुंज है,
मद  मुस्कान भरा  मधुवन  है...
शिशुता न्यून,अधिक यौवन है!

मंजुल  मंजु  मयंक  धरा  पर,
छिटक रही चंद्रिका रूपहली.
सुंदरि सुमुखि किशोरी युवती,
चढ़ने   लगी  नसेनी   पहली. 

दर्पण के  संग लीन  हो  चली,
सुमन सुवासित सुघर सृजन है...
शिशुता न्यून,अधिक यौवन है !

निरखे  मन  एकान्त कोष्ठ में,
हो    एकाग्र  उरज   सुघराई,
सहज सरल चित्रित  रतनारी,
चमक  उठी  चंद्रित  चतुराई.

रति क्रीड़ा रंजन श्रवणित कर,
सखी संग मन मुदित मगन है..
शिशुता न्यून,अधिक यौवन है!

पयोधरों का  बर्धन  लखकर,
मन   ही  मन  प्रसन्न  हो गई.
सखियों  से   एकान्त   वार्ता,
मन  प्रसन्न  आसन्न   हो  गई.

नव नितम्ब यौवन पर पुलकित,
मनसिज का सरसिज कुंजन है...
शिशुता न्यून,अधिक यौवन है !

सावधान  हो  जा  रे  मन्मथ !
प्रत्यंगों    पर     पहरा    देता,
मीन केतु का नित  नव वर्धन,
वृद्धि   शोध  को  गहरा  देता.

सुमुखि सुलोचनि आमुख यौवन,
चंद्रानन    कंचन    कानन   है...
शिशुता न्यून,अधिक यौवन है !

-अभिलाषा देशपांडे
 

   8
2 Comments

बेहतरीन

Reply